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शुक्रवार, नवंबर 08, 2013

बॉक्स तक सीमित "गरीब" खबरें

Amar Ujala (Lucknow edition) 7 nov 13 page-11

आजकल के अखबारों को पढ़ा जाए तो समझना आसान हो जाएगा कि आखिर जमाने में किस वर्ग को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, गरीब को या उच्च मध्य वर्ग/ अमीर को.

7 नवम्बर का अमर उजाला पढ़ा. अच्छा दैनिक समाचार पत्र है. पर मेरी नजर में इसकी उत्कृष्टा तब कम हो गयी, जब मेरी नज़र अलग अलग पेज पर एक जैसी खबरों पर गयी.
Amar Ujala (Lucknow edition) 7 nov 13 page-11
एक कोचिंग में पढने वाली यानि पैसे वाले परिवार की लड़की के साथ बदसलूकी हुयी तो तीन कॉलम खबर बना दी गयी. और वही एक गरीब दलित युवती से गैंग रेप यानी सामूहिक बालात्कार हुआ तो उस खबर को बॉक्स में फिट कर दिया गया....


ये बिल्कुल ऐसे ही है जेसे कुछ महीनों पहले हुआ था. जब दिल्ली में "निर्भया" के साथ दुराचार, हुआ तो पूरे देश का खून खोल गया और जब उसी दौरान, उसी दिल्ली में दलित का बालात्कार हुआ तो उन्हीं लोगों के खून में न जाने कौन सा बेक्टीरिया लग गया कि खून खोला ही नहीं.
लगता है अखबारों ने भी वही चलन स्वीकार कर लिया है.

एक बात तो साफ़ है, अभी दलित, पिछड़ों, गरीबों को और संघर्ष करना होगा.


सम्बंधित खबर - (http://teesrakadam.blogspot.in/2013/02/blog-post.html)

बुधवार, फरवरी 06, 2013



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